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बस्तर की सोने की थाली, पत्तों से बर्तन बनाने की कला

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बस्तर की सोने की थाली- बस्तर की सोने की थाली शायद आपको पता नहीं होगा तो आपको बता दे की बस्तर की शाब्दिक बोली में सोने की थाली सरगी के पत्ते से बनने वाली दोना पत्तल को सोने की थाली कहा जाता है। सरगी के पत्ते से बने दोना पत्तल में खाना खाने का मजा ही कुछ और होता है सबसे सुविधाजनक बात तो यह होता है कि इसे उपयोग के बाद फेंका जाता है। जो स्वतः नष्ट हो जाते हैं इनसे पर्यावरण की भी हानि नहीं होती।

किनने के द्वारा बनाया जाता है दोना पत्तल :-

बस्तर क्षेत्र में ग्रामीणों के द्वारा दोना पत्तल बनाया जाता है इसे बनाने का काम किसी समुदाय विशेष से नहीं जुड़ा है इसे किसी भी ग्रामिणों के द्वारा अपने आवश्यकता के अनुसार अपने कार्य के उपयोग के लिए बनाये जाते है।
जैसे बस्तर में कई पारम्परिक त्यौहार, मृत्यु भोज एंव शादियों और भी कई अनेक प्रकार की कार्यक्रम होते है जिनमें यह सरगी पत्ता से बनाई गई दोना पत्तल का उपयोग किया जाता है।

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दोना पत्तल कैसे तैयार किया जाता है :-

दोना पत्तल ग्रामिणों के द्वारा बनाया जाता है इसे बनाना बहुत ही आसान होता है दोना पत्तल बनाने में सरगी पेड़ के पत्ते और बांस की महीन तीलियों का प्रयोग किया जाता है। एक दोना बनाने में लगभग तीन पत्ते एंव पत्तल बनाने में लगभग सात पत्ते को उपयोग में लाया जाता है।

दोना पत्तल अपने आवश्यकता के अनुसार छोटा एंव बड़ा बनाया जाता है जिसमें पत्ते की संख्या कम या ज्यादा होता है। दोना पत्तल को बस्तर के हाट बाज़ारों में बेचने का कार्य भी किया जाता हैं।

यह बेचने का कार्य लगभग सालभर चलता रहता है दोना की किमत एक सौ की गड्डी चालीस रुपये व पत्तल की किमत एक सौ की गड्डी अस्सी रूपये की दर से बेची जाती है। जो ग्रामिणों की रोज के दौनिक उपयोग के लिए मुनाफा का साधन है। ऐसी ही जानकारी daily पाने के लिए हमारे Facebook Page को like करे इससे आप को हर ताजा अपडेट की जानकारी आप तक पहुँच जायेगी।

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