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सदियों पुरानी परम्परा, धान के बालियों से बनते है सेला झालर | Bastar Dhan Sela

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बस्तर में पके धान की बालियों को आकर्षक तरीके से गूँथ कर वंदनवार बनाया जाता है जिसे ‘सेला’ कहा जाता है जो हल्बी शब्द है। यह बस्तर के बाजारों में सभी प्रमुख उत्सवो में सजा रहता है जो बाजारों के आकर्षक का केन्द्र होता है यह सेला प्रत्येक गाँव में और प्रत्येक दस-पन्द्रह परिवारों में से एक परिवार में कोई-न-कोई ऐसा कलाकार होता है, जो सेला बनाने में पारंगत होता है।

घर की चैखट पर सेला लगाने की भारतीय परम्परा सदियों पुरानी है अधिकत्तर बस्तर में सभी प्रमुख उत्सवो नवरात्रि, दीपावली, गुड़ी पड़वा के अवसर पर घरो के प्रवेशद्वार पर वंदनवार लगाने की परम्परा आज भी प्रचलित है। इन त्यौहारो के शुभ अवसर पर देवी-देवताओ के स्वागत वन्दन पर पुष्प एंव आम पत्ते का वंदनवार लगाते है.. और स्वागत वन्दन के लगाये जाने के कारण ही ये वन्दनवार लगाते हैं।

बस्तर मे धान कटाई के बाद धान की बालियो से बने हुए सेला लगाने का रिवाज बरसो से चलते आ रहा है जो आज भी धान के इन वन्दनवारो को यहाँ सेला कहा जाता है। धान कटाई के बाद धान की बालियाँ सुखा कर रख ली जाती है.. धान की इन बालियो के तनो को आपस मे गुँथकर पांच अंगुल चैड़े एवं चैखट की माप के लम्बे पट्टे का आकार दिया जाता है. और इसे घर की चैखट पर लगा दिया जाता है।

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बाहरी दरवाजे की दीवार पर लटके सेला को प्राय: गौरय्या नामक चिड़िया चुग लेती है। इसे बनाना भी हर किसी के वश का नहीं होता। किन्तु यह अवश्य है ‘सेला’ को प्राय: दरवाज़े के ऊपरी हिस्से में दीवार से लटका दिया जाता है। सेला देवी देवताओ के सम्मान मे सर्वोत्तम माना जाता है. बस्तर मे सेला प्रायः किसानो के घरो एवं मंदिरो की शोभा बढाता हुआ दिखाई पड़ता है। धान कटाई के बाद होने वाले लक्ष्मी जगार के अवसर पर सेला लगाना बेहद ही शुभ माना जाता है।

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मां लक्ष्मी की पूजा में फल, मिठाई के साथ धान रखना शुभदायी माना जाता है। गांव-गांव में पर्व विशेष पर हर घर में धान की बाली द्वार पर सजाने की परंपरा है। एक झालर की कीमत 25 से 30 रुपए है। धान की झालर का एक फायदा यह भी है कि त्योहार के बाद इसे पक्षियों को खिलाने के लिए छत, आंगन में बिखेर सकते हैं।

गावों में टांगने की परंपरा

बस्तर के ग्रामीण इलाकों में द्वार पर चिरई-चुगनी टांगने की परंपरा चली आ रही है। जब धान पककर तैयार हो जाता है तो धान काटने के बाद बालियों का झूमर बनाकर द्वार पर लगाया जाता है ताकि कौरैया, कबूतर, कोयल व अन्य पक्षी चिडिय़ा, गौरैया, कोयल आदि पक्षी दाना चुग सकें। अगर यह जानकारी अच्छी लगी हो तो कमेंट करके जरूर बताऐ और ऐसी ही जानकारी daily पाने के लिए हमारे Facebook Page को like करे इससे आप को हर ताजा अपडेट की जानकारी आप तक पहुँच जायेगी।

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