बस्तर का आराध्य है आंगा देव जानिए क्या है मान्यता | Bastar Aanga dev

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आंगा देव Aanga dev बस्तर के आदिवासी समुदाय के एक देवता हैं, जिसकी पूजा किसी भी शुभ कार्य के पहले की जाती है। आंगा देव को बस्तर का आराध्य भी कहा जाता है। आंगा देव Aanga dev का चलायमान देवस्थान है। दरअसल आदिवासी समुदाय के लोग सागौन की लकड़ी से एक डोली की तरह बनाते हैं और इसे मिट्टी, मोर पंख सहित अन्य चिजों से सजाते हैं।

आंगा देव का निर्माण आदिवासी विधि विधान से किया जाता है और ऐसा माना जाता है कि इसमें देवता वास करते हैं। आदिवासी समुदाय के लोगों की बात मानें तो यह देव की मूर्ति नहीं है, लेकिन इस पर देव आता है। इसी पर देव को खिलाते हैं, इसकी सहायता से देव को एक गांव से दूसरे गांव ले जाते हैं।

माना जाता है की आदिवासी समुदाय लंबे समय तक एक स्थान पर नहीं रहते थे, वे एक निश्चित समय के बाद अपना ठिकाना बदल देते थे। इसके साथ ही वे अपने देवी-देवाताओं को अपने साथ ले जाते थे। ऐसे ही आंगा देव Aanga dev को आदिवासी समुदाय का चलायमान देवता माना जाता है।

ऐसे कई अवसर आते हैं, जब आदिवासी अपने देवी देवताओं को लेकर एक स्थान से लेकर दूसरे स्थान की यात्रा करते हैं। इस समय उनकी मूर्तियां किसी वाहन अथवा अन्य माध्यमों से लाई जाती हैं।

कैसे बनाया जात है आंगा :-

आंगा, सागौन की लकड़ी के दो गोल लट्ठों से बनाया जाता है। लट्ठों को जोड़ने का कार्य वृक्ष की छाल से बांधकर किया जाता है। मध्य में एक अन्य लकड़ी लगाई जाती है, जिसका अगला सिरा नाग के फन जैसा बनाया जाता है। इसे कोको कहा जाता है।

जब आंगा को निकाला जाता है या उसके द्वारा देव का आह्वान किया जाता है, तब आंगा का श्रृंगार किया जाता है। इस समय आंगा का पुजारी आंगा के कोको पर चांदी के पतरे का बना नागफन फिट करता है तथा आंगा की भुजाओं पर लोगों द्वारा मनौती पूर्ण होने पर चढ़ाई गई चांदी की पत्तियां बांधता है और चारों कोनों पर मोर पंख के गुच्छे फिट करता है।

कोई भी व्यक्तिए जिसे देव ने सपने में या अन्य प्रकार आंगा बनाने की प्रेरणा दी हो, वह आंगा बना सकता है। एक बार आंगा की स्थापना हो गई, तो फिर उसे सदैव के लिए निभाना पड़ता है।

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ये है मान्यता :-

आदिवासियों में ऐसी मान्यता है कि केवल पाट देवता का ही आंगा बनाया जा सकता है, किसी भी देवी का आंगा नहीं बनाया जा सकता। पाट देव पुर्लिंग होता है।

देव कुल में पाटदेव, देवी-देवता ओर भूत-प्रेत के बीच का स्थान रखता है। पाट देव की पूजा का निर्वाहन कुटुम्ब के पुरखों से चली आ रही परम्परा से होता है। किसी व्यक्ति के कुटुम्ब में पाट देव माना जाता रहा हो, तो उसे भी मानना पड़ता है।

गांवों में अलग-अलग समय पर आंगा बनाए जाते है, लेकिन आंगा तब बनाया जाता है जब देव किसी परिवार को सताए और फिर अपना आंगा स्थापित किए जाने की मांग करे।

आंगा जात्रा :-

आंगा जात्रा के अवसर पर बस्तर केसकाल घाटी स्थित भंगाराम देव के मन्दिर में आंगा देव Aanga dev एकत्रित होते हैं। जात्रा का आयोजन माघ माह के शानिवार को होता है। भंगाराम आसपास के 40 गांवों के देवों का मुखिया है। पूरे परगना के 40 गांवों के देवी-देवता इसकी जात्रा में आते हैं।

इस जात्रा में असली और नकली देवताओं की भी जांच होती है। भंगाराम सभी आंगा की जांचकर बता देता है कि कौन देव नकली है। किस ने उसे गांव वालों को धोखा देने के लिए बनाया है। सिद्ध हो जाने पर नकली आंगा को वहीं तोड़कर फेंक दिया जाता है।

केसकाल गांव का यह आंगा वर्ष में दो बार बाहर निकाला जाता है। एक तो भगांराम की जात्रा के समय, दूसरे मार्च माह में केसकाल के मेले में। इस मेले में अनेक आंगा, एवं डोलियां और अन्य देवी-देवता आते हैं। यह मेला होली के चार-पांच दिन बाद लगता है।

आंगा देव को महिलाएं नहीं उठा सकते क्यों?

आंगा को महिलाएं नहीं उठा सकतीं, क्योंकि मासिक धर्म होने से अपवित्र हो सकती हैं। कुछ लोगों ने कहा कि यदि महिलाएं नहाई और पवित्र हों तो आंगा को हाथ लगा सकती हैं। आंगा की प्रतिदिन पूजा करते हैं। सोमवार को विशेषतः पूजते हैं।

पूजा नहाकर, नीम्बू, नारियल, फूल-अगरबत्ती से करते हैं। वर्ष में मढ़ई मेले और जात्रा के अवसर पर आंगा को देव स्थान से बाहर निकाला जाता है। जैसे मांहचेनी जात्रा, भादों जात्रा, दशहरा जात्रा और मढई जात्रा के समय।

यदि आंगा बहुत पुराना हो गया हो या, उसकी लकड़ी सड़ गई हो तो खराब लकड़ी को निकाल कर नाले या तालाब में प्रवाहित कर देते हैं.. और नई लकड़ी से आंगा बना लेते हैं। यह सारा काम समारोहपूर्वक होता है, जिसके लिए सारा गांव चंदा करता है।

नए बने आंगा को पूरी तरह सजाया जाता है और पूजा की जाती है। आंगा बनाने के लिए सिरस की लकड़ी काम में लाई जाती है। बनाने का काम बढ़ई के द्वारा किया जाता है। इस तरह आंगा देव Aanga dev को बस्तर में पूजा जाता है तो यह जानकारी कैसी लगी अगर अच्छी लगी हो तो कमेंट करके जरूर बताऐ और ऐसी ही जानकारी daily पाने के लिए हमारे Facebook Page को like करे इससे आप को हर ताजा अपडेट की जानकारी आप तक पहुँच जायेगी।

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