बस्तर संभाग के सबसे खुबशुरत शहर

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बस्तर संभाग के सबसे खुबशुरत शहर- आज हम जानेगें बस्तर संभाग के सबसे खुबशुरत शहर के बारें में बस्तर संभाग का स्थापना वर्ष 1981 को हुआ है बस्तर संभाग में कुल 7 (सात) जिले है कांकेर, नारायणपुर, कोण्डागॉव, बस्तर (जगदलपुर), दंतेवाड़ा, सुकमा एंव बीजापुर इन जिलों का स्थापना वर्ष कुछ इस प्रकार है :-

बस्तर संभाग की जिले का स्थापना वर्ष :-

बस्तर – 1948
कांकेर – 25 मई 1998
दंतेवाडा – 25 मई 1998
नारायणपुर – 01 मई 2007
बीजापुर – 01 मई 2007
सुकमा – 01 जनवरी 2012
कोंडागांव – 01 जनवरी 2012

बस्तर संभाग के सबसे खुबशुरत शहर

बस्तर संभाग के सबसे खुबशुरत शहर– बस्तर संभाग में सबसे खुबशुरत शहरों में से है बस्तर जिला का मुख्यालय जगदलपुर, कांकेर, नारायणपुर, दंतेवाड़ा, कोण्डागॉव, सुकमा एंव बीजापुर इन शहरों में सारी सुविधाएं है तो चालिए इन शहरों के बारें में और अच्छे से विस्तर से जानते है :-

जगदलपुर शहर

जगदलपुर छत्तीसगढ़ प्रान्त के बस्तर जिले का एक प्रमुख शहर है। यह इस जिले का मुख्यालय भी है। जगदलपुर शहर बस्तर छत्तीसगढ़ के घने जंगलों को भाव जलप्रपात और सुरम्य वातावरण से पुरे छत्तीसगढ़ राज्य में चर्चित जगदलपुर शहर छत्तीसगढ़ राज्य के बस्तर जिले में अवस्थित एक प्रमुख औद्योगिक नगर कहा जाता है यहाँ अनेक दर्शनीय स्थल हैं यहाँ का तापमान सामान्यतः कम होता है।

जगदलपुर चारों ओर से पहाड़ियों एवं घने जंगलों से घिरा है। काकतिया राजा जिसे पाण्डुओ का वंशज कहा जाता है ने जगदलपुर को अपनी अंतिम राजधानी बनाया एवं इसे विकसित किया। जगदलपुर का नाम पूर्व में जगतुगुड़ा था।
जगदलपुर को चैराहों का शहर भी कहा जाता है। जगदलपुर शहर बस्तर की जानकारी कुल 223 स्क्वायर किलोमीटर के क्षेत्रफल में फैला हुआ जगदलपुर शहर बस्तर जिला और बस्तर डिवीजन का हेड क्वार्टर है जगदलपुर शहर का टोटल पापुलेशन तीन लाख 10 हजार 479 है।

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जबकि यहां का सेक्स रेश्यो 985 महिला प्रति 1000 पुरुष है जगदलपुर शहर का साक्षरता दर बहुत ही लाजवाब है जो कि 90.44% है जिसमें पुरुषों की साक्षरता दर 92.51% और महिलाओं की साक्षरता दर 88.37% है।

कांकेर शहर

कांकेर शहर पहले बस्तर जिले का एक हिस्सा था। लेकिन 1998 में बस्तर के उत्तरी भाग को पृथक कर नया राजस्व जिला के निर्माण के साथा उत्तर बस्तर कांकेर का गठन हुआ है कांकेर जिला दिनांक 25 मई 1998 से अस्तित्व में आया कांकेर को एक जिला के रूप में पहचान मिली।

कांकेर जिले का कुल क्षेत्रफल लगभग 5285.01 वर्ग किलोमीटर एवं जनसंख्या 5,91,579 है। मुख्य रूप से पांच नदियों में जिले के माध्यम से बहती हैं- दूध नदी, महानदी, हटकुल नदी, सिंदुर नदी और तुरु नदी। जिले को पूरे पहाड़ी इलाके में छोटी पहाड़ी इलाकों को देखा जाता है।

जिले के उत्तर में दुर्ग पूर्व में धमतरी पश्चित राजनांदगांव, महाराष्ट्र प्रांत का गढ़चिरौली जिला एवं जगदलपुर स्थित है। जिला कांकेर में राष्ट्रीय राजमार्ग 30 होकर गुजरती है। कांकेर रायपुर से 140 किलोमीटर दूर और जगदलपुर से 160 किलोमीटर दूर है। इस राष्ट्रीय राजमार्ग पर सड़क मार्ग और निजी बसों के साथ-साथ टैक्सी भी उपलब्ध हैं। जिला मुख्यालय से समस्त थाना/चौकी पक्की सड़क से जुड़े है।

वर्तमान में कांकेर जिले में कांकेर, चारामा, नरहरपुर, भानुप्रतापुर, अंतागढ़, कोयलीबेडा नामक 7 तहसील हैं। गांवों की कुल संख्या 1004 है। राजस्व गांवों की संख्या 995 है जबकि वन गांव 9 हैं। जिले की सीमा से लगा हुआ सीमावर्ती जिला नारायणपुर दक्षिण, में राजनांदगावं पश्चिम में, धमतरी उत्तर पूर्व में, बालोद उत्तर में एवं सीमावर्ती राज्य महाराष्ट्र पश्चिम में है। यह आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र है जिले के कुल क्षेत्रफल 5285.01 वर्ग कि0मी0 है।

दंतेवाड़ा शहर

दंतेवाड़ा एक छोटा शहर है जो छत्तीसगढ़ राज्य के दक्षिणी बस्तर क्षेत्र के दंतेवाड़ा जिले में स्थित है। दंतेवाड़ा शहर का नाम इस क्षेत्र की आराध्य देवी माँ दंतेश्वरी के नाम से पड़ा। अनुश्रुति है कि दक्ष यज्ञ के दौरान गिरे सती के बावन अंगों में से एक यहाँ गिरा और इस शक्तिपीठ का निर्माण स्थापित हुआ।

जिला दक्षिण बस्तर दंतेवाड़ा का गठन बस्तर जिले से पृथकीकरण के पश्चात 25 मई 1998 को अस्तित्व में आया। माँ दंतेश्वरी के ऐतिहासिक मंदिर के अलावा भी दंतेवाड़ा में पौराणिक और ऐतिहासिक महत्व के अनेक मंदिर और स्थापत्य हैं।

दंतेवाड़ा तथा इसके आसपास पर्यटन के स्थान दंतेवाड़ा एक सुंदर स्थान है जहाँ सुंदर दृश्य और पहाड़ियों की पंक्तियाँ हैं।
दंतेवाड़ा अपने ऐतिहासिक महत्व के लिए जाना जाता है दंतेवाड़ा में माड़िया, मुड़िया, धुरवा, हल्बा, भतरा, गोंड जैसे अनेक जनजातीय समूह है। इनके द्वारा उत्सवों और मेले के दौरान गाये जाने वाले गीत और नृत्यों से ग्रामीण संस्कृति के चटख रंग सामने आते हैं जो आपके भीतर गहराई से शांति, सुकून और आनंद भर देते हैं।

नारायणपुर शहर

नारायणपुर शहर छत्तीसगढ़ राज्य के नारायणपुर जिले का प्रशासनिक मुख्यालय है। नारायणपुर Narayanpur छत्तीसगढ़ प्रान्त के बस्तर संभाग का एक शहर है। यह 01 मई 2007 को बस्तर जिले से उत्पन्न दो नए जिलों में से एक है। नारायणपुर जिला छत्तीसगढ़ के 27 जिलों में एक जिला है जो वर्ष 2011 तक यह छत्तीसगढ़ का सबसे कम आबादी वाला जिला है।

नारायणपुर जिले में 1 उपमंडल है एंव नारायणपुर जिले में 2 तहसीलें है ओरछा और नारायणपुर है, लोक सभा क्षेत्र 0 है जिले में 2 विधान सभा क्षेत्र है, नारायणपुर और ओरछा, नारायणपुर में 572 गाँव है और 317 ग्राम पंचायते है, और इनमे 413 राजस्व ग्राम है, 39 वन ग्राम है, 30 वीरान गांव है।

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नारायणपुर का क्षेत्रफल 6440.21 वर्ग किलोमीटर है, और 2011 की जनगणना के अनुसार नारायणपुर की कुल जनसंख्या 139,820, जिसमें पुरूषों की कुल जनसंख्या 70,104 एंव महिलाओं की कुल जनसंख्या 69,716, पुरुष साक्षरता 33,449, महिला साक्षरता 23,172 साक्षरता का प्रतिशत 58,202 और जनसँख्या घनत्व 20 /km2 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर है, महिला पुरुष अनुपात यहाँ पर 998 महिलाये प्रति 1000 पुरुषो पर है, जिले की जनसँख्या विकासदर 2001 से 2011 के बीच 19.56% रहा है।

बीजापुर शहर

बीजापुर शहर एक छोटा शहर है जो बस्तर संभाग के सबसे अंतिम छोर पर स्थित है। इस जिले को दंतेवाडा जिले से अलग करके 1 मई 2007 को बनाया गया है। बीजापुर शहर इस जिले का प्रशासनिक मुख्यालय है। यह पहले दंतेवाड़ा जिले का हिस्सा था। बीजापुर जिला छत्तीसगढ़ राज्य के दक्षिणी हिस्से में स्थित है।

यह जिला छत्तीसगढ़ राज्य के दंतेवाड़ा जिले के पूर्व में, आंध्र प्रदेश राज्य के दक्षिण और पश्चिम के निचले आधे हिस्से पर और महाराष्ट्र राज्य के शेष पश्चिमी हिस्से में स्थित है। जिले का कुल क्षेत्रफल लगभग 6562.48 वर्ग किलोमीटर है। इसके चार ब्लॉक डिवीज़न बीजापुर, भैरमगढ़, भोपालपट्टनम और उसूर में बंटा हुए इस जिले में कुल 169 ग्राम पंचायतें हैं।

जहां लगभग 2,55,230 की आबादी निवास करती है जिसमें करीबन 48,767 ग्रामीण आदिवासी जनसंख्या निवास करती है। बीजापुर जिला जंगलो से समृद्ध है यहां की साक्षरता दर 2011 की जनगणना के अनुसार लगभग 41.58 % है। जिले के अधिकांश भाग में पहाड़ियां हैं। जिले का सबसे ऊंचा शिखर बैलाडिला है, जिसे “बैल का कूबड़” भी कहा जाता है।

बीजापुर इंद्रावती नदी के दक्षिण में स्थित है और उत्तर-दक्षिण की ओर बहता है। जिले के उत्तरी भाग के जंगल में साग (टेक्टोना ग्रैंडिस), साल (शोरोरा-बस्टा), सिरसा (डाल्बर्गिया लैटिफ़ोलिया), बिजनल (पेटोकार्पस मार्सूपियम), कुसुम (स्केलिच्रा त्रिजुगा), पाल (बुटिआ फ्रोंडोसा), महुआ (बासिया लतिफोलिया) तेंदु (डायस्पोयस मेलानॉक्सिलोन), हररा (टर्मिनलिया चेब्यूला) आओला (फिलाएंथस इम्ब्लिका) सजा (टर्मिनल टॉन्टोसा), कौहा (टी। अर्जुन), सलाई (बोसवेलिया साराटाटा), चार (बुकानानिया लातिफोलिया) आदि पेड़ पाए जाते हैं।

सुकमा शहर

सुकमा शहर एक छोटा शहर है जो 01 जनवरी 2012 को नए जिले के रूप में अपना अस्तित्व मिल गया है। यह LWE प्रभावित जिला है जो विकास से बहुत दूर है। यह राज्य की राजधानी से 400 किमी दूर पर स्थित है और यह NH-30 से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है।

इस जिले की जनसंख्या एसटी के रूप में 85% से अधिक है इसके क्षेत्र का 65% जंगल और केवल 45 कि0मी0 प्रति वर्ग किमी के बेहद कम जनसंख्या घनत्व के साथ कवर किया गया है। यह जनजातीय समुदाय गोंड की मुख्य भूमि है यह भी भारत में सबसे कम साक्षरता दर में से एक है।

कोण्डागॉव शहर

कोण्डागॉव शहर छत्तीसगढ़ प्रान्त के बस्तर संभाग का एक शहर है कोण्डागॉव का प्राचीन नाम कोण्डानार था। कोण्डागॉव जिले की निर्माण की घोषणा दिनांक 01 जनवरी 2012 को की गई तथा इसका विधिवत उद्वघाटन 16 जनवरी 2012 को हुआ कोण्डागॉव जिला कुल 6050.73 वर्ग किमी क्षेत्रफल में फैला हुआ है।

वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार यह छत्तीसगढ़ का सर्वाधिक स्त्री-पुरुष अनुपात ( 1033:1000 ) जनघनत्व 157, साक्षरता दर 56.4 प्रतिशत, पुरूषो की साक्षरता दर 67.45 प्रतिशत महिलाओं की साक्षरता दर 45.37 प्रतिशत वाला जिला है। कोण्डागांव जिला का राजस्व अनुभाग कोण्डागाँव एवं केशकाल, जिले का तहसील कोण्डागाँव, केशकाल फरसगाँव, माकड़ी एंव बड़ेराजपुर।

ग्राम पंचायत की संख्या 263, कुल जनसंख्या 578824, जिसमें पुरूषों की कुल जनसंख्या 284781 एंव महिलाओं की कुल जनसंख्या 294043, साक्षरता का प्रतिशत 57.31, स्कूलों की संख्या 2153 आश्रम छात्रावास की संख्या 122 एंव सामुदायिक अस्पताल 05 है।

कोण्डागॉव जिला में भारत सरकार द्वारा नारियल बोर्ड स्थापित किया गया है जो छत्तीसगढ में एक मात्र है यह नारियल उगने से लेकर नरियल व़क्ष से विभिन्न वस्तुए बनाने का प्रशिक्षण देने का भी प्रावधान है कोण्डागॉव में वन विभाग का जो काष्ठागार है वह एसिया में सबसे बडा विशाल है।

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जिसका क्षेत्रफल 200 एकड से भी अधिक है। उम्मीद करता हूँ यहं जानकारी आप को पसंद आई। हो सके तो अपने दोस्तो के साथ भी शेयर जरूर करे। ऐसी ही जानकारी daily पाने के लिए हमारे Facebook Page को like करे इससे आप को हर ताजा अपडेट की जानकारी आप तक पहुँच जायेगी।

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