शरीर को ऊर्जा, स्फूर्ति देने वाला बस्तर का पारम्परिक आहार लांदा – Bastar Landa

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बस्तर Bastar में खान पान की दृष्टि से बस्तर, सरगुजा, रायगढ़ का मैदानी इलाका क्षेत्र में भिन्नताएं हैं और वहीं बस्तर की बात करें तो यहां चावल और चावल से बने भोज्य सभी जगह लोकप्रिय माना जाता हैं परन्तु स्थानिय व्यंजनों और पकवानों में विभिन्नता है। बस्तर में नशीले द्रव्यों का सेवन सामान्य है और सल्फी Salfi ,महुआ Mahua तथा लांदा Landa को तरल भोजन समान माना जाता है।

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लांदा Landa एक ऐसा प्रचलित पेय पदार्थ है जिसे बड़कड़ी Badkadi के नाम से भी जाना जाता है इसे चावल के आटे से तैयार किया जाता है। अकसर यह लांदा बस्तर के हाट बाजारों में हांडियों में दूध की तरह सफेद बिकते हुए दिखाई देता है लोग इसे प्रति गिलास की दर से खरीद कर सेवन करते है।

लांदा Landa को ग्रामीणों द्वारा बस्तर के हाट बाजारों में बेचने लाया जाता हैं, जिसे ग्रामीण कुछ आमदनी कर लेते है इसका स्वाद हल्का सा तीखा खट्टा होता है।

भूख प्यास लगने पर तरल पेय पदार्थ सेवन किया जाता है जिससे शरीर को ऊर्जा स्फूर्ति एवं पोषण देता हैं जितना की ठोस भोजन से प्राप्त होता है गर्मी के दिनों में शरीर को जल की आवश्यकता अधिक होती है नहीं तो लूह बहुत जल्दी लग जाती है, पेट में तरल सुपाच्य होने के कारण शरीर को जल की जलापूर्ति बनी रहती है।

वनांचल के ग्रामीण निवासी भोजनापूर्ति के लिए पेय पदार्थों को अधिक महत्व देते हैं, पेज, पसिया, लांदा Landa आदि यंहा अन्न से बनने वाले एवं सल्फी, छिंदरस, ताड़ी आदि वृक्ष से निकलने वाले पेय पदार्थ का सेवन बहुत अधिक किया जाता हैं, जो कि स्वास्थ्य के लिए हितकारी माना जाता हैं।

लंदा
                                                                       बाजार में लांदा बेचते हुए

इस तरह तैयार किया जाता है लांदा

लांदा Landa चावल के आटे से बनाया जाता है इसके लिए साधारण व अंकुरित दो तरह के चावल का आटा उपयोग में लाया जाता है, धान को 2-3 दिन भिगाकर रखने पर यह अंकुरित हो जाता है, अंकुरित धान को सुखाकर मूसल से कूट कर चावल निकला जाता है।

अब चावल को चक्की में पीस लिया जाता है फिर उसके बाद आटे को भाप में पकाया जाता है, जिससे पकाने के लिए चूल्हे के ऊपर मिटटी का हांड़ी रखा जाता है, जिसमें पानी भरा होता है और हांड़ी के ऊपर टुकना रख दिया जाता है।

जिसमें चावल का आटा होता है, अच्छी तरह भाप में पकाया जाता है, फिर उसे ठंडा किया जाता है इसके पश्चात एक अन्य हंडी में आवश्कतानुसार पानी लेकर उसमे पके आटे को डाल देते है रात में लगभग 1 सोली 500 ग्राम अंकुरित चावल का आटा पानी में भीगा दिया जाता है

सुबह तक इस चावल के गाढ़े घोल में हल्की खटाई आ जाती है अब 1 से 2 कि0ग्रा0 साधारण चावल के आटे को पानी में उबाल लेते हैं अब दोनों प्रकार के चावल के घोल को ठंडे पानी में मिलाकर चूल्हे के किनारे रख दिया है।

जिसका उपयोग खमीर के तौर पर किया जाना बताते है और गर्मी के दिनों में 3 से 4 दिन, ठण्ड में थोडा ज्यादा समय के लिए रख देते है। और इस प्रकार लांदा तैयार हो जाता है तैयार लांदा Landa को 3 से 4 दिन में उपयोग करना होता है अन्यथा इसमें खट्टापन बढ़ जाता है बस्तर Bastar में दुःख त्यौहार या कहीं सगा के यहाँ जाने पर भी लोग इसे लेकर चलते है।

इस प्रकार खट्टा मीठा लांदा Landa या बरकड़ी Badkadi पीने के लिए तैयार हो जाता है। अगर आप कभी बस्तर आएं तो लांदा बड़कड़ी सल्फी का स्वाद लेना न भूलें उम्मीद करता हूँ यहं जानकारी आप को पसंद आई। हो सके तो अपने दोस्तो के साथ भी शेयर जरूर करे ऐसी ही जानकारी daily पाने के लिए हमारे Facebook Page को like करे इससे आप को हर ताजा अपडेट की जानकारी आप तक पहुँच जायेगी।

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