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बस्तर की प्राकृतिक धरोहर है यंहा की संस्कृति – Bastar culture

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भारत पूरे विश्व मे अपने कला Art व संस्कृति culture के लिए जाना जाता है, यही भारत मे एक खूबसूरत सा बसा राज्य छत्तीसगढ़ Chhattisgarh हैं जो दक्षिण कौशल के नाम से पहचाने जाने वाला राज्य अपनी संस्कृति culture, सुंदर, पर्यटन स्थलों और मनमोहक वादियो के अलावा माओवाद और नक्सलवाद गतिविधियों की वजह से पूरे विश्व मे जाना जाता है।

राजधानी रायपुर से 300 किलोमीटर की दूरी पर स्थित एक संभाग है बस्तर Bastar, जंहा जन, जंगल एवं अपार प्राकृतिक सुंदरता के बीच बसता है।

बस्तर एक आदिवासी क्षेत्र है, यह देश में कहीं भी पाए जाने वाले जनजातियों आदिवासी स्वदेशी की सबसे बड़ी ताकत है बस्तर वास्तव में भारत में सबसे पुराना और सबसे घनी आदिवासी बस्ती है।

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बस्तर घने जंगलों ऊँची पहाड़ियों झरनों गुफाओ एवं वन्य प्राणियों से भरा हुआ है, जो बस्तर महल, बस्तर दशहरा, चित्रकोट जलप्रपात, तीरथगढ़ जलप्रपात, अमृतधारा जलप्रपात, सातधारा जलप्रपात, कांगेर धारा जलप्रपात, तामडा घूमर जलप्रपात, हांदावाड़ा जलप्रपात, चित्रधारा जलप्रपात, नीलम सरई जलप्रपात, झारालावा जलप्रपात, कुटुमसर गुफा और कैलाश गुफ़ा आदि पर्यटन के मुख्य केंद्र हैं। बस्तर की प्रमुख शक्तिपीठ है माँ दंतेश्वरी माई।

माँ दंतेश्वरी मंदिर बस्तर के दंतेवाड़ा जिले में स्थित है जो ऐतिहासिक रूप से क्षेत्र महाकाव्य रामायण में दंडकारण्य और महाभारत में कोसाला साम्राज्य का हिस्सा है। बस्तर Bastar में महिलाएं एक महत्वपूर्ण नियम निभाती है, और जो उनकी पोशाक भी अलग-अलग और रंगीन होती है।

उन्हें मोतियों और धातुओं से बने आभूषण पहनना बहुत ज्यादा पसंद होता है, और कई आदिवासी अब आधुनिक पोशाक पहनते हैं पुरुष आम तौर पर धोती या लुंगी पहनते हैं।

बस्तर में जनजातियाँ अपनी विशिष्ट, जनजातीय संस्कृति culture और पारंपरिक जीवन शैली के लिए जानी जाती हैं। वे अपनी ही दुनिया में रहते हैं और हमेशा अपने में खुश व मुस्कुराते चेहरों के साथ सच्चे और ईमानदार होते हैं।

सात जिलो में विभाजित है बस्तर संभाग

बस्तर का मुख्यालय जगदलपुर jagdalpur जो बस्तर संभाग में सात जिलो में विभाजित है – कोण्डागॉव, कांकेर, नारायणपुर, बीजापुर, सुकमा,जगदलपुर,दंतेवाड़ा।

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बस्तर जिले की जनसंख्या

बस्तर जिले में वर्ष 2011 के अनुसार जनसंख्या 8,34,375 थी जिसमे पुरुष 4,13,706 एवं महिला 4,20,669 बस्तर की जनसंख्या मे 70 प्रतिशत जनजातीय समुदाय जैसे गोंड, माड़िया, मुरिया, भतरा, हल्बा, धुरुवा समुदाय के हैं।

बस्तर में बोली जाने वाली भाषा

बस्तर में 36 बोलियां बोली जाती थीं लेकिन अब गोंडी, हल्बी, भतरी, धुरवी, परजी, माड़ी जैसी कुछ-कुछ बोलियां ही बची हैं जो बस्तर की कुछ बोलियाँ संकट ग्रस्त हैं और इनके संरक्षण व संवर्धन की जरूरत है।

बस्तर की दो दर्जन से अधिक बोलियां विलुप्त हो चुकी हैं। उम्मीद करता हूँ यहं जानकारी आप को पसंद आई। हो सके तो अपने दोस्तो के साथ भी शेयर जरूर करे। ऐसी ही जानकारी daily पाने के लिए हमारे Facebook Page को like करे इससे आप को हर ताजा अपडेट की जानकारी आप तक पहुँच जायेगी।

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