लुप्त होता जा रहा है बस्तर का देसी थर्मस तुमा – Desi Tharmas tuma

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बस्तर में प्रकृति जीवन का सबसे ज्यादा योगदान रहता है। जहां हम प्लास्टिक स्टील एवं अन्य धातुओं से बने रोजमर्रा की वस्तुओं का उपयोग करते है वहीं बस्तर में आज भी प्राकृतिक फलों पत्तियों एवं मिटटी से बने बर्तनों का उपयोग करते है और ऐसा ही प्रकृति प्रदत्त वस्तुओं में नाम जाना है तुमा tuma, जो बस्तर में इसे देशी थर्मस Desi Tharmas, बस्तरिया थर्मस एवं बोरका borka के नाम से भी जाना जाता है जो अब बहुत ही कम देखने को मिल रहा है।

बस्तर के आदिवासी पहले साल भर तुमा का उपयोग करते थे। पहले किसी के पास पानी या पेय पदार्थ को रखने के लिए कोई बोतल या थर्मस Tharmas नहीं होता था। तब खेतों में या बाहर या जंगलों में पानी को साथ में रखने के लिए तुमा tuma ही एक सहारा था। जो हर आदिवासी के पास दिखाई पड़ता है।

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देशी थर्मस Desi Tharmas का प्रयोग पेय पदार्थ रखने के लिए किया जाता है इसमें रखा हुआ पानी या अन्य कोई भी पेय पदार्थ सल्फी, छिन्द रस, ताड़ी, पेज आदि में वातावरण का प्रभाव नहीं पड़ता है यदि उसमे सुबह ठंडा पानी डाला है तो वह पानी शाम तक वैसे ही ठंडा रहता है और खाने वाले पेय को और भी स्वादिष्ट बना देता है

पहले किसी भी साप्ताहिक हाट मेले आदि में हर कंधे में तुमा tuma लटका हुआ दिखाई पड़ता था अब इसकी जगह प्लास्टिक के बोतलों ने ले ली है बस्तर में दैनिक उपयोग के लिए तुमा बेहद महत्वपूर्ण वस्तु है। बाजार जाते समय हो या खेत मे हर व्यक्ति के बाजू में देशी थर्मस Desi Tharmas तुमा tuma लटका हुआ रहता है।

अब यह धीरे धीरे लुप्त होने के कगार पर है और अब आधुनिक मिनरल बोतलो ने तुमा tuma का स्थान ले लिया है ज़िससे अब तुमा कम देखने को मिलता है। बदले समय के साथ आदिवासियों ग्रामीणजनों के रहन सहन में भी बदलाव आ गया है जिसके चलते अब बस्तर में गर्मी आने के बावजूद तुमा न के बराबर दिख रहे हैं।

ऐसे बनाते है तुमा

तुमा देसी लौकी से बनाया जाता है। तुमा बनाने से पहले ग्रामीण यह देखते है कि जो लौकी सबसे गोल मटोल जिसका आकार लगभग सुराही की तरह हो और इसमें पेट गोल एवं बड़ा मुंह वाला हिस्सा लंबा पतला गर्दन युक्ता होता है उसे ही तुमा बनाने के लिए चुना जाता है और उस लौकी में एक छोटा सा छिद्र किया जाता है और फिर उसको आग में गर्म कर उसके अन्दर का सारा गुदा छिद्र से बाहर निकाल दिया जाता है।

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लौकी का बस मोटा बाहरी आवरण ही शेष रहता है आग में तपाने के कारण लौकी का बाहरी आवरण कठोर हो जाता है जिससे वह अन्दर से पुरी तरह से साफ हो जाता है और तुमा बनाने का काम सिर्फ ठंड के मौसम में ही किया जाता है जिससे तुमा बनाते समय लौकी की फटने की संभावना कम रहती है।

तुमा में बनाते है कलाकृति

तुमा tuma उपयोग करने लायक होता है तो इसके ऊपर कला आकृतियां बनाई जाती है ग्रामीण अपने अपने तरीके से तुमा के ऊपर आकृति बनाते है जैसे जानवरों के चेहरे, पारंपरिक हथियार, मुखौटे पक्षियों का चित्रण किया जाता है इन तुमा की सहायता से मुखौटे भी बनाए जाते हैं तुमा को बुहत सुन्दर बनाने के लिए उस पर रंग बिरंगी रस्सी भी लपेटी जाती है। तुमा बस्तर में आदिवासियों की कला के प्रति रूचि को प्रदर्शित करता है।

निष्कर्ष:-

बस्तर में अब आधुनिक मिनरल बोतलों ने देशी थर्मस Desi Tharmas तुमा tuma का स्थान ले लिया है, जिससे अब यह कम देखने को मिलता है। अब वह दिन ज्यादा दूर नहीं जब हमें तुमा tuma संग्रहालयों में सजावट की वस्तु के रूप में देखाई देगा।

वर्तमान में तुमा tuma के संरक्षण की आवश्यकता है। उम्मीद करता हूँ यहं जानकारी आप को पसंद आई है। हो सके तो अपने दोस्तो के साथ शेयर भी जरूर करे। ऐसी ही जानकारी daily पाने के लिए Facebook Page को like करे इससे आप को हर ताजा अपडेट की जानकारी आप तक पहुँच जायेगी।

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