बस्तर संभाग का एक मात्र ईटो से निर्मित बौद्ध गृह – bhongapal kondagaon

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भोंगापाल bhongapal छत्तीसगढ़ chhattisgarh में कोंडागांव kondagaon जिले के फरसगांव  ब्लॉक में स्थित एक गाँव है। छत्तीसगढ़ के कोंडागांव जिले के ग्रामीण क्षेत्र में स्थित यह कोंडागांव जिले के फरसगांव ब्लॉक के 103 गांवों में से एक है। ग्राम पंचायत भोंगापाल bhongapal एक मध्यम आकार का गाँव है जो लसुरा नदी के तट पर है।
भोंगापाल  जनगणना 2011 की जानकारी के अनुसार भोंगपाल गाँव का स्थान कोड या गाँव कोड 448997 है।

भोंगापाल गाँव की साक्षरता दर 0-6 आयु वर्ग के बच्चों की आबादी 129 है जो गाँव की कुल जनसंख्या का 19.97% है। भोंगापाल गाँव का औसत लिंग अनुपात 1084 है जो छत्तीसगढ़ राज्य के 991 के औसत से अधिक है।

जनगणना के अनुसार भोंगापाल के लिए बाल लिंग अनुपात 1048 है जो छत्तीसगढ़ के औसत 969 से अधिक है। भोंगापाल गाँव में छत्तीसगढ़ की तुलना में साक्षरता दर कम है। 2011 में छत्तीसगढ़ के 70.28% की तुलना में भोंगापाल गाँव की साक्षरता दर 35.20% थी।

भोंगापाल में पुरुष साक्षरता 48.18% है जबकि महिला साक्षरता दर 23.33% है यह गाँव का कुल भौगोलिक क्षेत्रफल 875.36 हेक्टेयर है। नकारात्मक पक्ष यह है कि भोंगापाल गाँव की अशिक्षा दर आश्चर्यजनक रूप से उच्च है – 71%। यहां कुल 646 व्यक्तियों में से 464 निरक्षर हैं। यहां पुरुष निरक्षरता दर 61% है क्योंकि कुल 310 में से 191 पुरुष अशिक्षित हैं। महिलाओं में निरक्षरता दर 81% है और इस गाँव में कुल 336 महिलाओं में से 273 निरक्षर हैं।

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ग्राम पंचायत भोंगापाल bhongapal के पास दो किमी की दूरी पर घने वन में लतुरा नदी के तट पर ईट निर्मित ऐतिहासिक बौद्ध चैत्य गृह स्थापित है। यह प्राचीन टीला स्थित बुद्ध प्रतिमा स्मारक छत्तीसगढ़ राज्य द्वारा संरक्षित है

विगत वर्षों में पाया गया यह एक मात्र चैतालय है, जो 6 वि शाताब्दी ईसवीं में नल वंश के नरेशों द्वारा निर्मित प्रतीत होता है बुद्ध चैत्य और प्राचीन हिन्दू मंदिर 5 वीं -6 वीं शताब्दी के हैं। इस जगह की खुदाई से पहले, 1.20 मीटर चौड़ी, 1.30 मीटर लंबी विशाल बुद्ध की मूर्ति मिली है।

यह प्राचीन मूर्ति खराब रूप में है चैत्य मंदिर ईंटों से बना है और यह छत्तीसगढ़ का पहला और एकमात्र ईंट निर्मित चैत्य मंदिर है इसे बस्तर संभाग का एक मात्र ईंट निर्मित चैत्य गृह का गौरव मिला हुआ है। वर्ष 1990-91 में खुदाई के दौरान यह चैत्य गृह सामने आया था। इस स्थान से 200 गज (1800 वर्ग फुट) दूर दो सप्तमातृक टीला है जिसे ‘रानी टीला’ के नाम से जाना जाता है।

यहां एक विशाल शिव मंदिर और अन्य मंदिरों के अवशेष मिलते हैं लेकिन यहां कोई मूर्ति मौजूद नहीं है। यह महान पुरातात्विक महत्व का है। स्थानीय लोग बुद्ध की मूर्ति को गंधदेव और सप्तमातृका को गंधदेव की पत्नियों के रूप में संदर्भित करते हैं। ग्रामीण पूजा अर्चना करते हैं।

अनुमान है कि चैत्य गृह का निर्माण छठीं शताब्दी में हुआ था। इस प्रकार शिव मंदिर के स्मारक भी इन्हीं के समकालीन है। इस गृह के भग्नावशेष पर बुद्ध की एक विशाल प्रतिमा स्थापित है जिसे स्थानीय ग्रामवासी डोकरा बाबा और डोडा मुदिया के नाम से जानते हैं।

कैसे पहुचें भोंगापाल

बस सेवाओ के जरिये  विभिन्न उपलब्ध से आसानी से पहुँच सकते है
रायपुर – अभनपुर  – धमतरी  – कांकेर  – फरसगॉव – भोंगापाल

जगदलपुर  –  कोंडागांव  – फरसगॉव – भोंगापाल

निष्कर्ष:-
भोंगापाल bhongapal में प्राचीन कई अन्य प्रकार की मूर्तियां देखी जा सकती है आपको भी एक बार भोंगापाल की यात्रा जरूर करनी चाहिए उम्मीद करता हूँ जानकारी आप को पसंद आई है। हो सके तो दोस्तो के साथ शेयर भी जरूर करे। ऐसी ही जानकारी daily पाने  के लिए Facebook Page को like करे इससे आप को हर ताजा अपडेट की जानकारी आप तक पहुँच जायेगी |
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